क्षमा क्या है? What is forgiveness?

जय मां भवानी!जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!!

।।ॐ।।

।।श्री गणेशाय नमः।।

क्षमा का क्या महत्व है? — 
What is the importance of forgiveness?

अर्थ : अगर कोई आपके प्रति किसी प्रकार का अपराध करे तो आपके मन में उसके प्रति क्रोध को शांत कर लेना। क्षमा शब्द क्षम का अपभ्रंश है, जिससे एक और शब्द क्षमता भी बना है। क्षमता का अभिप्राय शक्ति है, बल से है। वास्तविक रुप में क्षमा का अर्थ सहनशीलता है। 


क्षमा का महत्व : अनेक धर्मों के धर्मग्रन्थों में क्षमा के महत्व को दर्शाया गया है। शास्त्रों में कहा गया है ‘क्षमा वीरस्य भुषणम्’ अर्थात् क्षमा वीरों का आभुषण है। वाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है ‘क्षमा हि मूलं सर्वतपमास’ अर्थात् क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है । महाभारत में कहा गया है ‘क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभुषण है’। महाभारत में यह भी कहा गया है कि ‘दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओं का बल दंड है और गुणवानों का बल क्षमा है’


पूजन प्रक्रिया में क्षमा मांगने का नियम : दैनिक जीवन में जाने अनजाने अनेक गलतियां होती रहती हैं। पूजा में क्षमा प्रार्थना का संदेश यही है कि दैनिक जीवन में हमसे जब भी कोई अपराध हो जाय, तो हमें तुरंत ही क्षमा मांग लेनी चाहिए। 


विभिन्न धर्मों में क्षमा का वर्णन :

दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओ का बल दंड है और गुणवानों का बल क्षमा है ।  - महाभारत

 • बौद्ध ग्रंथ संयुक्तनिकाय में लिखा है ‘दो तरह के मुर्ख होते हैं, एक वे जो अपने कृत्यों को अपराध के रूप में नहीं देखते।  और दुसरे वे जो दुसरों के अपराध स्वीकार कर लेने पर भी क्षमा नहीं करते’।

• बाइबिल में प्रभु ईशु के शब्दों में उल्लेख किया गया है ‘ हे पिता इन्हें क्षमा कर देना ; क्योंकि इन्हें नहीं पता ये क्या करने जा रहे हैं’।

• इस्लामिक ग्रन्थ कुरआन शरीफ में उल्लेखित है ‘जो धैर्य रखे और माफ कर दे ; तो यह उसके लिए बहुत हिम्मत का काम है’। 

•गुरु ग्रन्थ साहिब का वचन है ; क्षमाशील को रोग नहीं सताता है और न यमराज डराता है।

कुछ महापुरुषों के द्वारा 'क्षमा' पर विचार :

  • क्षमावानों के लिए यह लोक है। क्षमावानों के लिए ही परलोक है। क्षमाशील पुरुष इस जगत में सम्मान और परलोक में उत्तम गति पाते हैं। - वेदव्यास
  • संसार में मानव के लिए क्षमा एक अलंकार है । - वाल्मीकि
  • इस जगत में क्षमा वशीकरण रूप है। भला क्षमा से क्या नहीं सिद्ध होता ? जिसके हाथ में शांतिरूपी तलवार है, उसका दुष्ट पुरुष भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते। - विदुर नीति
  • क्षमा से बढ़कर और किसी भी बात में पाप को पुण्य बनाने की शक्ति नहीं है। - जयशंकर प्रसाद
  • जो लोग बुराई का बदला लेते है, बुद्धिमान उनका सम्मान नहीं करते, किन्तु जो अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते है, वे स्वर्ग के अधिकारी समझे जाते है ।  -तिरुवल्लुवर
  • वृक्ष अपने काटने वाले को भी छाया देता है। - चैतन्य प्रभु
  • विद्वान क्षमा से ही शुद्ध होते हैं। - मनुस्मृति
  • त्रुटि करना मानवीय है और क्षमा करना ईश्वरीय। - एलेक्जेंडर  पॉप 
  • माफ़ी मांगने का ये अर्थ नहीं कि आप गलत हैं और दूसरा सही। - डॉ. अर्पित जैन (IPS)

नोट : हम माफी मांगने या माफ करने से कभी छोटे नहीं होते हैं, बस हम खराब भावों से ऊपर उठ जाते हैं, मन से हल्के हो जाते हैं, सामने वाले व्यक्ति पर अपने प्रेम और स्नेह से जीत पा लेते हैं, अर्थात इन सब में हमारे व्यक्तित्व की जीत ही जीत है।


निष्कर्ष  : इस लेख में हमने 👉सनातन धर्म की तीसरी तत्व क्षमा के बारे में जाना। उम्मीद करते हैं आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी और आपके लिए उपयोगी भी होगी, इसे अपने परिजनों के साथ शेयर जरुर करें। ऐसी ही और भी जानकारी पाने के लिए हम से जुड़े रहे... 

...धन्यवाद।

॥जय मां भवानी॥

Follow us "एक पल खुशी के"


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Dhanteras_01

भाई दूज या यम द्वितीया का माहात्म्य