दया क्या है? What is mercy?

जय मां भवानी!जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!!

।।ॐ।।

।।श्री गणेशाय नमः।।

दया क्या है?
What is mercy?

अर्थ : दया शब्द हिंदी में काफी प्रयुक्त होता है। इसका का अर्थ करुणा है।कई विद्वानो ने दया की अलग अलग परिभाषा दी है,तुलसीदास जी ने दया को धर्म का मूल कहा है।जब तक ह्रदय मे दया है,तब तक धर्म उस पर टिका हुआ है, दया की अनुपस्थिती में धर्म का कोई अस्तित्व नही है।

दया और धर्म का महत्व : दया और धर्म ये दोनों अच्छे गुण या आचरण हैं। जहाँ दया होती है, वहाँ धर्म भी होता है और जहाँ लोभ (लालच) होता है, वहाँ पाप होता है। इसी प्रकार जहाँ क्रोध होता है, वहाँ काल या मृत्यु होती है और जहाँ क्षमा होती है, वहाँ ईश्वर होते हैं। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए दया और क्षमा को अपनाना चाहिए, लोभ व क्रोध को त्यागना चाहिए।



हम कष्ट आने पर दूसरों से दया चाहते हैं। वस्तुत: दया एक मानवीय गुण है। दूसरों के प्रति दया भाव रखने से व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलती है और आत्मिक शांति एक ऐसी देन है, जिसे आप दुनिया के किसी बाजार में नहीं खरीद सकते। ईश्वर से भी हम यह मांगते हैं कि प्रभु हम पर तुम्हारी दया दृष्टि बनी रहे।

कहा भी गया है :

जहाँ दया तहँ धर्म है, जहाँ लोभ तहँ पाप। 
जहाँ क्रोध तहँ काल है, जहाँ छिमा तहँ आप ॥

अर्थात् , जहाँ दया है, वहाँ धर्म है और जहाँ लोभ है, वहाँ सदा पाप है। इसी प्रकार जहाँ क्रोध है, वहाँ काल का निवास है और जहाँ क्षमाशील प्राणी है, वहाँ ईश्वर निवास करता है।



निष्कर्ष  : इस लेख में हमने 👉सनातन धर्म की तीसरा तत्व दया के बारे में जाना। उम्मीद करते हैं आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी और आपके लिए उपयोगी भी होगी, इसे अपने परिजनों के साथ शेयर जरुर करें।

॥जय मां भवानी॥

धन्यवाद।

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