सत्य क्या है? what is the truth?
जय मां भवानी!जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!!
।।ॐ।।
।।श्री गणेशाय नमः।।
सत्य (जो जैसा है उसे वैसा ही समझना)
सत्य के प्रकार : मुख्य रूप से सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक।
व्यवहारिक सत्य : व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है। व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है।
वास्तविक या परम सत्य : जो वास्तविक सत्य है, जिसको परम सत्य कहते हैं, जिसका अर्थ है कि सब प्राणियों को धारण करने वाला आत्मा एक है! उसमें कभी कोई बदलाव नहीं होता। जन्म से लेकर मृत्यु तक वह एक जैसा रहता है। न उसकी मृत्यु है, न जन्म! उसी आत्मा के आधार पर शरीर चल रहा है ! और वो आत्मा ‘मैं’ ही हूँ ! इसी अपने शुद्ध भाव में टिकना ही सत्य में टिकना कहलाता है। यही वास्तविक सत्य है या परम सत्य है। व्यवहारिक सत्य में कभी मान और कभी अपमान मिलता ही रहेगा, लेकिन इस सत्य में टिकने के बाद आनंद का अनुभव हर पल होता रहेगा।
सत्य (truth) के अलग-अलग सन्दर्भों में एवं अलग-अलग सिद्धान्तों में सर्वथा भिन्न-भिन्न अर्थ हैं।
सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पंथा वितोतो देवयानः।
येनाक्रमन्त्यृषयो हयाप्तकामा यात्रा तत सत्यस्य परमं निदानम्॥
- सारे पुण्यों और सद्गुणों की जड़ सत्य है - महर्षि वाल्मीकि।
- सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं, सत्य स्वयं परब्रह्म परमात्मा है - वेदव्यास।
- सत्य से पापी को डर लगता है - सुकरात।
- सत्यमेव जयते (सत्य की जीत होती है) - मुंडक उपनिषद।
- जिससे प्राणियों का अत्यधिक हित हो वही उत्तम सत्य होता है।
यद् भूतहितमत्यन्तं तद् वै सत्यं परं मतम् ।।
- सत्य ही सज्जनों का व्रत है।
- सत्य से बढ़कर और कोई वस्तु श्रेष्ठ नहीं है।
- सत्य ही वेद और वेदाङ्ग हैं। सत्य ही विद्या और विधि अनुष्ठान हैं। सत्य से ही व्रतों का पालन किया जाता है। ओंकार भी सत्य है।
- सत्य के समान कोई धर्म नहीं है, सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। असत्य से बढ़कर भयंकर पाप इस संसार में कोई नहीं हैं।
- मैने सत्य से बढ़कर और कोई परम पवित्र वस्तु कहीं नहीं पाई है।
- जैसे जहाज से समुद्र पार किया जाता है। वैसे ही सत्य स्वर्ग जाने की सीढ़ी है।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें