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श्री दुर्गा सप्तशती के कुछ सिद्ध मंत्र

श्री दुर्गा सप्तशती के कुछ सिद्ध मंत्र ( १ ) सामूहिक कल्याणके लिये--- "देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या, निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या । तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां, भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥ (२ ) विश्वके अशुभ तथा भयका विनाश करनेके लिये -- "यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो , ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च । सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय, नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु ॥ ( ३ ) विश्वकी रक्षाके लिये -- "या श्री : स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी :, पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः । श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा , तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम् ॥ ( ४ ) विश्वके अभ्युदयके लिये-- " विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं , विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम् । विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति । विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥ ( ५ ) विश्वव्यापी विपत्तियोंके नाशके लिये-- "देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद, मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं , त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ॥ ( ६ ) विश्वके पाप - ताप - निवारणके लिये-- ...

मां शक्ति की कथा (story of Maa Shakti)

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। मां शक्ति की कथा  STORY OF MAA SHAKTI भूमिका :    मां शक्ति आखिर कौन हैं जिन्हें हम संपूर्ण ब्रह्मांड के सर्वोच्च शक्ति से परिपूर्ण मानते हैं। आइए मां शक्ति की कथा को संक्षिप्त में जानने की कोशिश करते हैं। मां शक्ति की कथा Jay Mata Di   माता शक्ति की कथा (story of Maa Shakti in Hindi- Jay Mata di)   सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री सती माता को शक्ति कहा जाता है। शिव के कारण उनका नाम शक्ति हो गया। हालांकि उनका असली नाम दाक्षायनी था। यज्ञ कुंड में कुदकर आत्मदाह करने के कारण भी उन्हें सती कहा जाता है।  बाद में उन्हें पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वह पर्वतराज की पुत्री थी। पिता की ‍अनिच्छा से उन्होंने हिमालय के इलाके में ही रहने वाले योगी शिव से विवाह कर लिया।   एक यज्ञ में जब दक्ष ने सती और शिव को न्यौता नहीं दिया, फिर भी माता सती शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई, लेकिन दक्ष ने शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें ...

श्री दुर्गा चालीसा

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। श्री दुर्गा चालीसा DURGA CHALISA महत्व :    दुर्गा चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इसे पढ़ते हैं हर दिन अपने जीवन में सभी नकारात्मक भावनाओं पर काबू पाए जा सकते हैं और सकारात्मक सोच की ओर बढ़ना शुरू कर सकते हैं।बाधाएं दूर हो जाती हैं, मां सभी रूपों में अपने प्रचुर प्रेम से कृपा करती हैं। श्री दुर्गा चालीसा Jay Mata Di   श्री दुर्गा चालीसा (Shri Dugra Chalisa in Hindi- Jay Mata di)   नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ अर्थ: माँ को प्रणाम जो सभी को सुख देती है। उस अम्बे माँ को प्रणाम जो सब के दुखों का हरण कर लेती है।   निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ अर्थ: हे माँ! आपकी जो ज्योत है वह निराकार अर्थात सिमित न होकर असीम है । यह तीनों जगत में चारों ओर फैली हुई है।   शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ अर्थ: चंद्र के समान चमकने वाला आपका मुख बहुत ही विशाल है। आपके नयन लाल और आपकी भौहें विकराल है।   रूप मात...

छठ महापर्व

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। छठ महापर्व CHHATH FESTIVAL महत्व : छठ का पहला दिन नहाय खाय होता है. छठ के व्रत को सबसे कठिन व्रत माना जाता है. मान्यता है कि जो महिलाएं छठ के नियमों का पालन करती हैं, छठी माता उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं. छठ पूजा में सूर्य देव का पूजन किया जाता है. यह पर्व चार दिनों तक चलता है. छठ पर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है. खरना का अर्थ होता है शुद्धिकरण. खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाने की परंपरा है.  नहाय खाय : छठ पर्व का पहला दिन जिसे ‘नहाय-खाय’ के नाम से जाना जाता है,उसकी शुरुआत चैत्र या कार्तिक महीने के चतुर्थी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है ।सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके बाद व्रती अपने नजदीक में स्थित गंगा नदी,गंगा की सहायक नदी या तालाब में जाकर स्नान करते है। व्रती इस दिन नाखनू वगैरह को अच्छी तरह काटकर, स्वच्छ जल से अच्छी तरह बालों को धोते हुए स्नान करते हैं। लौटते समय वो अपने साथ गंगाजल लेकर आते है जिसका उपयोग वे खाना बनाने में करते है ।  खरना : खरना के दिन महिलाएं पूरे दिन...

क्षमा क्या है? What is forgiveness?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। क्षमा का क्या महत्व है? —  What is the importance of forgiveness? अर्थ : अगर कोई आपके प्रति किसी प्रकार का अपराध करे तो आपके मन में उसके प्रति क्रोध को शांत कर लेना। क्षमा शब्द क्षम का अपभ्रंश है, जिससे एक और शब्द क्षमता भी बना है। क्षमता का अभिप्राय शक्ति है, बल से है। वास्तविक रुप में क्षमा का अर्थ सहनशीलता है।  क्षमा का महत्व : अनेक धर्मों के धर्मग्रन्थों में क्षमा के महत्व को दर्शाया गया है। शास्त्रों में कहा गया है ‘क्षमा वीरस्य भुषणम्’ अर्थात् क्षमा वीरों का आभुषण है। वाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है ‘क्षमा हि मूलं सर्वतपमास’ अर्थात् क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है । महाभारत में कहा गया है ‘क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभुषण है’ । महाभारत में यह भी कहा गया है कि ‘दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओं का बल दंड है और गुणवानों का बल क्षमा है’ । पूजन प्रक्रिया में क्षमा मांगने का नियम :  दैनिक जीवन में जाने अनजाने अनेक गलतियां होती रहती हैं। पूजा में क्षमा प्रार्थना का ...

दया क्या है? What is mercy?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।।

अहिंसा क्या है? What is nonviolence?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। अहिंसा क्या है? What is nonviolence? अहिंसा का अर्थ :  शाब्दिक रूप से अहिंसा शब्द अ+हिंसा के योग से बना है। अत: अहिंसा का शाब्दिक या सामान्य अर्थ है- जो हिंसा न हो। इस प्रकार किसी की हत्या न करना या किसी प्राणी को कष्ट न पहुंचाना अहिंसा है, जबकि हिंसा का अर्थ इसके ठीक विपरीत यानी किसी की हत्या करना या किसी प्राणी को कष्ट पहुंचाना है। हिंसा में ‘अ’ उपसर्ग के जोड़ देने से इसका अर्थ बिल्कुल बदल जाता है। सामान्य अर्थ में हिंसा किसी भी जीव के प्राण हरण या उसे किसी प्रकार का कष्ट देना है। किन्तु, इस अर्थ में पूर्ण अहिंसा प्राय: असंभव ही है, क्योंकि हमारा जीवन ही किसी न किसी रूप में हिंसा पर आधारित है।  अहिंसा की परिभाषा :  व्यापक अर्थ में अहिंसा को किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से नुकसान नहीं पहुंचाने के अर्थ में देखा जाता है। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी से नुकसान न पहुंचाना तथा कर्म से भी किसी भी प्राणी की हिंसा न करना, यह अहिंसा है। अहिंसा के प्रकार :   मुख्य रूप से ...