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छठ महापर्व

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। छठ महापर्व CHHATH FESTIVAL महत्व : छठ का पहला दिन नहाय खाय होता है. छठ के व्रत को सबसे कठिन व्रत माना जाता है. मान्यता है कि जो महिलाएं छठ के नियमों का पालन करती हैं, छठी माता उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं. छठ पूजा में सूर्य देव का पूजन किया जाता है. यह पर्व चार दिनों तक चलता है. छठ पर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है. खरना का अर्थ होता है शुद्धिकरण. खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाने की परंपरा है.  नहाय खाय : छठ पर्व का पहला दिन जिसे ‘नहाय-खाय’ के नाम से जाना जाता है,उसकी शुरुआत चैत्र या कार्तिक महीने के चतुर्थी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है ।सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके बाद व्रती अपने नजदीक में स्थित गंगा नदी,गंगा की सहायक नदी या तालाब में जाकर स्नान करते है। व्रती इस दिन नाखनू वगैरह को अच्छी तरह काटकर, स्वच्छ जल से अच्छी तरह बालों को धोते हुए स्नान करते हैं। लौटते समय वो अपने साथ गंगाजल लेकर आते है जिसका उपयोग वे खाना बनाने में करते है ।  खरना : खरना के दिन महिलाएं पूरे दिन...

क्षमा क्या है? What is forgiveness?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। क्षमा का क्या महत्व है? —  What is the importance of forgiveness? अर्थ : अगर कोई आपके प्रति किसी प्रकार का अपराध करे तो आपके मन में उसके प्रति क्रोध को शांत कर लेना। क्षमा शब्द क्षम का अपभ्रंश है, जिससे एक और शब्द क्षमता भी बना है। क्षमता का अभिप्राय शक्ति है, बल से है। वास्तविक रुप में क्षमा का अर्थ सहनशीलता है।  क्षमा का महत्व : अनेक धर्मों के धर्मग्रन्थों में क्षमा के महत्व को दर्शाया गया है। शास्त्रों में कहा गया है ‘क्षमा वीरस्य भुषणम्’ अर्थात् क्षमा वीरों का आभुषण है। वाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है ‘क्षमा हि मूलं सर्वतपमास’ अर्थात् क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है । महाभारत में कहा गया है ‘क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभुषण है’ । महाभारत में यह भी कहा गया है कि ‘दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओं का बल दंड है और गुणवानों का बल क्षमा है’ । पूजन प्रक्रिया में क्षमा मांगने का नियम :  दैनिक जीवन में जाने अनजाने अनेक गलतियां होती रहती हैं। पूजा में क्षमा प्रार्थना का ...

दया क्या है? What is mercy?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।।

अहिंसा क्या है? What is nonviolence?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। अहिंसा क्या है? What is nonviolence? अहिंसा का अर्थ :  शाब्दिक रूप से अहिंसा शब्द अ+हिंसा के योग से बना है। अत: अहिंसा का शाब्दिक या सामान्य अर्थ है- जो हिंसा न हो। इस प्रकार किसी की हत्या न करना या किसी प्राणी को कष्ट न पहुंचाना अहिंसा है, जबकि हिंसा का अर्थ इसके ठीक विपरीत यानी किसी की हत्या करना या किसी प्राणी को कष्ट पहुंचाना है। हिंसा में ‘अ’ उपसर्ग के जोड़ देने से इसका अर्थ बिल्कुल बदल जाता है। सामान्य अर्थ में हिंसा किसी भी जीव के प्राण हरण या उसे किसी प्रकार का कष्ट देना है। किन्तु, इस अर्थ में पूर्ण अहिंसा प्राय: असंभव ही है, क्योंकि हमारा जीवन ही किसी न किसी रूप में हिंसा पर आधारित है।  अहिंसा की परिभाषा :  व्यापक अर्थ में अहिंसा को किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से नुकसान नहीं पहुंचाने के अर्थ में देखा जाता है। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी से नुकसान न पहुंचाना तथा कर्म से भी किसी भी प्राणी की हिंसा न करना, यह अहिंसा है। अहिंसा के प्रकार :   मुख्य रूप से ...

सत्य क्या है? what is the truth?

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जय मां भवानी! जय सनातन धर्म! हर हर महादेव!!! ।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। सत्य (जो जैसा है उसे वैसा ही समझना) सत्य की परिभाषा :   सत्य का शाब्दिक अर्थ होता है सते हितम् यानि सभी का कल्याण । इस कल्याण की भावना को हृदय में बसाकर ही व्यक्ति सत्य बोल सकता है. एक सत्यवादी व्यक्ति की पहचान यह है कि वह वर्तमान, भूत अथवा भविष्य के विषय में विचार किये बिना अपनी बात पर दृढ़ रहता है. मानव स्वभाव में सत्य के प्रति आगाध श्रद्धा एवं झूठ के प्रति घृणा के भाव आते हैं। सत्य के प्रकार :  मुख्य रूप से सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक ।  व्यवहारिक सत्य : व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है। व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है। वास्तविक या परम सत्य :   जो वास्तवि...

सनातन धर्म

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।।ॐ।। ।।श्री गणेशाय नमः।। जय मां भवानी !  जय सनातन धर्म!! हर हर हर महादेव!!! सनातन धर्म (Eternal Religion)     सनातन धर्म अपने हिंदू धर्म के वैकल्पिक नाम से भी जाना जाता है। वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये 'सनातन धर्म' नाम मिलता है। 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'सदा बना रहने वाला', अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म मूलतः भारतीय धर्म है, जो किसी समय पूरे बृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के उपरांत भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक जनसंख्या इसी धर्म में आस्था रखती है। सनातन धर्म में कौन कौन आते हैं?      वर्तमान में सनातन का पर्याय हिन्दू है पर सिख , बौद्ध , जैन धर्मावलम्बी भी सनातन धर्म का हिस्सा है, क्योंकि बुद्ध भी अपने को सनातनी कहते हैं। यहाँ तक कि नास्तिक जोकि चार्वाक दर्शन को मानते हैं वह भी सनातनी हैं। सनातन धर्मी के लिए किसी विशिष्ट पद्धति, कर्मकांड, वेशभूषा को मानना जरूरी नहीं। सनातन धर्म के मूल तत्व  सनातन धर्म के मूल तत्व 👉 सत्य , 👉 अहिंसा , 👉 दया , 👉 क...

मनुष्य जीवन में कुल कितने ऋण हैं?

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मनुष्य जीवन में कुल कितने ऋण हैं?     हिंदू शास्त्र के अनुसार,                            मनुष्य जीवन में मुख्यतः तीन प्रकार के ऋण है :  देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण।             आइए, इन तीनों ऋण के बारे में कुछ जानने की कोशिश करते हैं । 1.  देव ऋण  :   माना जाता है कि देव ऋण भगवान विष्णु का है। यह ऋण उत्तम चरित्र रखते हुए दान और यज्ञ करने से चुकता होता है। जो लोग धर्म का अपमान करते हैं या धर्म के बारे में भ्रम फैलाते या वेदों के विरुद्ध कार्य करते हैं, उनके ऊपर यह ऋण दुष्प्रभाव डालने वाला सिद्ध होता है। 2.  ऋषि ऋण  :  यह ऋण भगवान शंकर का है। वेद, उपनिषद और गीता पढ़कर उसके ज्ञान को सभी में बांटने से ही यह ऋण चुकता हो सकता है। जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता है उससे भगवान शिव और ऋषिगण सदा अप्रसन्न ही रहते हैं। इससे व्यक्ति का जीवन घोर संकट में घिरता जाता है या मृत्यु के बाद उसे किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती।   3. पितृ ऋण :  यह ब्रह्मा ...